राष्ट्रपति के बारे में पूरी जानकारी



राष्ट्रपति :- भारतीय संविधान के अनुच्छेद 52 में राष्ट्रपति पद के वर्णन किया गया है।
राष्ट्रपति संसद के अनिवार्य एवं अभिन्न अंग होता है। भारत के कार्यपाली का संविधानीक प्रधान राष्ट्रपति ही होता है।



🔸राष्ट्रपति बनने की योग्यता :- 
Ⅰ. वह भारत का नागरिक हो।

Ⅱ. उसकी उम्र कम से कम 35 वर्ष हो।

Ⅲ. वह लोकसभा का सदस्य बनने की क्षमता रखता हो।

Ⅳ. वह पागल, दिवालिया तथा न्यायालय द्वारा घोषित अपराधी न हो।

Ⅴ. वह कोई लाभ के पद पर न हो।

🔸 राष्ट्रपति का चुनाव :- 
Ⅰ. विधानसभा में मनोनीत अंग्ल भारतीय (Anglo Indian) सदस्य सभी राज्यों का तथा जम्मू और कश्मीर के दो महिला (राज्यपाल) के द्वारा।

Ⅱ. लोकसभा में दो अंग्ल भारतीय सदस्य (मनोनीत राष्ट्रपति के द्वारा)

Ⅲ. राज्यसभा में 12 मनोनीत सदस्य (अन्य क्षेत्रों से राष्ट्रपति द्वारा)

नोट :- उपरोक्त राष्ट्रपति के चुनाव में भाग नहीं लेता है।
निर्वाचित सभी सदस्य भाग लेते हैं।

➤  राष्ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचन मंडल के द्वारा होता है। इस निर्वचन मंडल मे निम्नलिखित शामिल होते हैं।

a. लोकसभा के निर्वाचित सदस्य।

b. राज्यसभा के निर्वाचित सदस्य।

c. विधानसभा के निर्वाचित सदस्य।

🔸 राष्ट्रपति का शपथ :- राष्ट्रपति को उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के द्वारा शपथ दिलायी जाती है। परंतु उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश नहीं रहने पर उच्चतम न्यायालय के अन्य वरिष्ठ न्यायधीश के द्वारा राष्ट्रपति को शपथ दिलायी जाती है।

🔸 राष्ट्रपति का वेतन :- राष्ट्रपति को वेतन भारत के संचित निधि से 1 लाख 50 हजार रुपये हर महीने दिया जाता है। इनकी अन्य सेवाएं जैसे - आवास, हवाई सेवा, टेलीफ़ोन, और मुफ्त इलाज इत्यादि निशुल्क दिया जाता है।

➤  राष्ट्रपति को सेवानिवृत्त होने के बाद 9 लाख रुपये वार्षिक पेंशन मिलता है।

नोट :- राष्ट्रपति को कर (Tax) से मुक्त रखा जाता है।
राष्ट्रपति का वेतन भत्ता और पेंशन का निर्धारण संसद करती है।

🔸 राष्ट्रपति का कार्यकाल :- राष्ट्रपति का चुनाव 5 वर्षों के लिए होता है। परंतु 5 वर्ष से पहले भी अपनी इच्छा से उपराष्ट्रपति को त्याग पत्र सौप कर अपने पद से इस्तीफा दे सकता है।
नोट :- राष्ट्रपति पर संविधान के अनुच्छेद 61 के तहत महाभियोग (आरोप) प्रस्ताव किसी भी सदन में (लोकसभा और राज्यसभा) लाया जा सकता है। यदि इस प्रस्ताव को लोकसभा में लाया जाता है और लोकसभा के सदस्यों के दो तिहाई (2/3) बहुमत से प्रस्ताव पारित करके राज्यसभा में भेजा जाता है।
राज्यसभा लगाए गए आरोपों के जाँच करता हैं और जांच करने के बाद दो तिहाई (2/3) बहुमत से पारित कर देता है और प्रस्ताव को राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर (Signature) के बाद महाभियोग की क्रिया पूरी हो जाती है और उसी समय राष्ट्रपति को त्याग पत्र देना पड़ता है।

➤ राष्ट्रपति पर आरोप लगाने के पूर्व उन्हे 14 दिन पहले सूचित किया जाता है।

➤ राष्ट्रपति पर महाभियोग लगाने से पहले 14 दिन पूर्व प्रस्ताव की सूचना देनी पड़ती है तथा राष्ट्रपति को वकील के साथ उपस्थित होकर सफाई देने का अधिकार भी प्राप्त है।

➤ राष्ट्रपति के रिक्ति को 6 महीना के अंतर्गत भरना होता है।
🔸राष्ट्रपति के कार्य :- भारतीय संविधान में आपातकालीन अधिकार के तहत राष्ट्रपति को तीन प्रकार के अधिकार दिए गए हैं। जो कि निम्नलिखित हैं -

Ⅰ. राष्ट्रीय आपातकाल लागू करने का अधिकार :-
अनुच्छेद 352 के तहत राष्ट्रपति को राष्ट्रीय आपातकालीन अधिकार दिया गया है। इस अधिकार के तहत भारत पर किसी बाहरी शक्ति के आक्रमण करने पर देश के सम्पूर्ण भाग में एक भाग में शस्त्र विद्रोह होने के स्थिति में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की जाती है।

नोट :- भारत में अब तक तीन बार आपातकाल लागू हो चुका है।

a.) 1962 :- पहली बार 1962 ईo में चीन के आक्रमण के समय आपातकाल लागू हुआ था।

b.) 1971 :- दूसरी बार 1971 ईo में बंग्लादेश के आजादी के समय आपातकाल लागू हुआ था।

c.) 1974-75 :- तीसरी बार 1974-75 मे इन्दिरा गांधी के शासन के समय आपातकाल लागू हुआ था।

Ⅱ. राष्ट्रपति शासन लागू करने का अधिकार :-
अनुच्छेद 356 के तहत किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन की घोषणा तब की जाती है जब उस राज्य में शासन व्यवस्था, वहां मुख्यमंत्री द्वारा संविधान के अनुसार शासन व्यवस्था नहीं चलायी जा रही हो।

⟹  राज्यपाल राष्ट्रपति को इस बात की सूचना देते हैं कि इस राज्य में शासन व्यवस्था ठीक ढंग से नहीं चल रही है। तब केंद्रीय मंत्री परिषद् की सलाह से उस राज्य में राष्ट्रपति शासन की घोषणा की जाती है।

⟹  जब राष्ट्रपति शासन लागू हो जाता है, तो समस्त अधिकार एवं शक्ति उस राज्य के राज्यपाल के दायरे में होता है।

Ⅲ.  वित्तीय आपातकाल लागू करने का अधिकार :-
अनुच्छेद 360 के तहत यह आपातकाल लागू किया जाता है।
जब भारत में आर्थिक स्थिति खराब हो जाती है या भारत के किसी इकाई के आर्थिक स्थिति खराब हो जाती है तो वित्तीय आपातकाल की घोषणा अनुच्छेद 360 के तहत राष्ट्रपति केन्द्रीय मंत्री परिषद् के सलाह से करते हैं।

नोट :- वित्तीय आपातकाल की घोषणा भारत में अभी तक नहीं किया गया है।

🔸कार्यकालिका  संबंधित अधिकार :-
1. प्रधानमंत्री तथा मंत्रीपरिषद् का गठन करने का अधिकार :-

लोकसभा में बहुमत दल के नेता को राष्ट्रपति के द्वारा प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त किया जाता है तथा प्रधानमंत्री के सलाह से अन्य मंत्रियों को राष्ट्रपति के द्वारा नियुक्त किया जाता है।

नोट :- प्रधानमंत्री तथा मंत्रियों को राष्ट्रपति के द्वारा शपथ दिलायी जाती है।

2. केन्द्रीय स्तर के समस्त आयोगों को राष्ट्रपति के द्वारा गठित किया जाता है।
जैसे - राष्ट्रीय महिला आयोग, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग, संघ लोक सेवा आयोग, संयुक्त राष्ट्र सेवा आयोग, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग, वित्त आयोग इत्यादि।

2 komentar